क्विक कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर FSSAI का बड़ा प्रहार: ऑनलाइन किराना पर एक्सपायरी और बैच नंबर बताना होगा अनिवार्य, डार्क किचन की होगी जांच!
नई दिल्ली: 10 मिनट में राशन और खाना पहुंचाने का दावा करने वाले क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य सुरक्षा नियामक (FSSAI) ने बड़ा शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। खाने-पीने के सामान में मिलावट, बासी या एक्सपायर प्रोडक्ट की डिलीवरी और भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए FSSAI कड़े नियम बना रहा है। FSSAI के सीईओ राजित पुन्हानी के अनुसार, ई-कॉमर्स उनका अगला मुख्य फोकस है और कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए गाइडलाइंस को बेहद सख्त किया जा रहा है।
ऑनलाइन लिस्टिंग में अब छिपा नहीं सकेंगे जानकारी
नए नियमों के लागू होने के बाद क्विक कॉमर्स ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म पर सामान की पूरी जन्मकुंडली देनी होगी:
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एक्सपायरी और बैच नंबर: ऐप पर प्रोडक्ट लिस्टिंग के साथ मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
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प्लेटफॉर्म पर गिरेगी गाज: कंपनियों द्वारा किए जाने वाले किसी भी तरह के भ्रामक दावों के लिए अब थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म भी सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
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डार्क किचन की फोटो और पता: केवल डिलीवरी के लिए चलने वाली रसोइयों (Dark Kitchens) का असली पता और फोटो दिखाना अनिवार्य करने पर विचार चल रहा है। साथ ही, डार्क स्टोर्स में फ्रोजन आइटम्स और स्टोरेज की परिस्थितियों की सख्त जांच की जाएगी।
दोगुनी हुई जांच, बड़ी कंपनियों पर भी गिरी गाज
पुन्हानी के मुताबिक, ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट, फ्लिपकार्ट और अमेज़न पर गलत ब्रांडिंग, अवैध लाइसेंस और प्रतिबंधित सामान बेचने के मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। कंपनियों के खिलाफ मुकदमों में पिछले साल की तुलना में 5 से 6 गुना बढ़ोतरी हुई है। अकेले अप्रैल से सितंबर के बीच करीब 7 लाख जांच-पड़ताल की गई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं।
इतना ही नहीं, विज्ञापनों, भ्रामक दावों, बच्चों के प्रोडक्ट्स की गलत मार्केटिंग और स्टोरेज के मामलों को लेकर नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, डाबर इंडिया और फाइव-स्टार होटलों को भी फटकार लगाई गई है। वहीं सप्लीमेंट इंडस्ट्री में 3-5 साल पुरानी मंजूरियों की समीक्षा की जा रही है और वजन घटाने के दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया है। हालांकि पेप्सिको और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों ने नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन FSSAI का रुख साफ है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा।